निम्नलिखित गद्याशं को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए- शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
निम्नलिखित गद्याशं को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
शिक्षा मनुष्य के जीवन का वह दीपक है, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है और व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है। शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसा साधन है जो व्यक्ति के व्यवहार, सोच और कार्यशैली को सकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। प्राचीन भारत में शिक्षा को बहुत ऊँचा स्थान प्राप्त था। गुरुकुलों में विद्यार्थी केवल पाठ्यक्रम ही नहीं पढ़ते थे, बल्कि वे जीवन मूल्यों, मर्यादा, संयम और आत्मनिर्भरता का भी अभ्यास करते थे। आज भले ही शिक्षा पद्धति बदल गई हो, परंतु शिक्षा का उद्देश्य आज भी वही है — एक सच्चे, सजग, और उत्तरदायी नागरिक का निर्माण। शिक्षा व्यक्ति को आत्मविश्वास देती है। एक शिक्षित व्यक्ति समाज की समस्याओं को समझ सकता है, उनके समाधान ढूंढ सकता है और दूसरों को भी जागरूक बना सकता है। शिक्षा ही वह साधन है, जो समाज में व्याप्त रूढ़ियों, अंधविश्वासों और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने की ताकत देता है। महात्मा गाँधी ने कहा था, “वास्तविक शिक्षा वही है जो शरीर, मन और आत्मा — तीनों का समन्वित विकास करे।” इसका तात्पर्य है कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने या नौकरी पाने का माध्यम न होकर एक समग्र व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया होनी चाहिए। आज के दौर में डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन कक्षाएं और तकनीकी माध्यमों ने पढ़ाई को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही नैतिक शिक्षा, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की शिक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति डिग्रियों से भरा हो लेकिन उसमें सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा-भाव न हो, तो वह शिक्षित कहलाने योग्य नहीं। शिक्षा केवल स्कूल या कॉलेज तक सीमित नहीं है। जीवन भर सीखते रहना, नए अनुभवों से ज्ञान प्राप्त करना, गलतियों से सीखना — यह भी शिक्षा का ही एक रूप है। माता-पिता, शिक्षक, समाज और स्वयं जीवन — सभी शिक्षा के स्रोत हैं। एक शिक्षित समाज ही प्रगति कर सकता है। शिक्षा ही वह नींव है जिस पर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है। इसलिए यह हम सभी का कर्तव्य है कि हम स्वयं भी शिक्षा प्राप्त करें और दूसरों को भी शिक्षित करने में सहयोग दें। विशेषकर बालिकाओं और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना समाज की सच्ची सेवा है। इस प्रकार, शिक्षा वह अमूल्य धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता, कोई बांध नहीं सकता और जो जितना बांटें, उतना ही बढ़ता है। यही शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषता है।
प्रश्न 1. शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है?