गद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर देंमनुष्य – जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई________ नहीं रह गई हैं।

गद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दें।
मनुष्य उत्सवप्रिय होते हैं। उत्सवों का एकमात्र _____ आनंद – प्राप्ति है। यह तो सभी जानते हैं कि मनुष्य अपनी आवश्यकता का पूर्त्ति के लिए आजीवन प्रयत्न करता रहता है। आवश्यकता की _______होने पर सभी को सुख होता है, पर, उस सुख और उत्सव के इस आनंद में बड़ा अंतर है आवश्यकता अभाव सुचित करती है। उससे यह प्रकट होता है कि हममें किसी बात की कमी है। मनुष्य – जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई________ नहीं रह गई हैं। एक के बाद दूसरी वस्तु की चिंता उसे सताती ही रहती है। इसलिए किसी एक आवश्यकता की पूर्ति से उसे जो सुख होता है, वह अत्यंत ________ होता है; क्योंकि तुरंत ही दूसरी आवश्यकता उपस्थित हो जाती है। उत्सव में हम किसी बात की आवश्यकता का अनुभव नहीं करते। यही नहीं, उस दिन हम अपने काम काज छोड़कर विशुद्ध_______ की प्राप्ति करते हैं।
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मनुष्य – जीवन ही ऐसा है कि वह किसी भी अवस्था में यह अनुभव नहीं कर सकता कि अब उसके लिए कोई________ नहीं रह गई हैं।

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