जब कोई ध्वनि स्रोत (जैसे घंटी, तालियाँ, या बोलने वाला व्यक्ति) ध्वनि उत्पन्न करता है, तो वह ध्वनि तरंगों के रूप में चारों ओर फैलती है।
यदि आसपास कई कठोर सतहें (जैसे दीवारें, पहाड़, इमारतें) मौजूद हों, तो ध्वनि तरंगें इन सतहों से परावर्तित होकर वापस लौटती हैं।
स्रोत द्वारा ध्वनि उत्सर्जन बंद कर देने के बाद भी ये परावर्तित तरंगें कुछ समय तक सुनाई देती रहती हैं।
इस घटना को ही प्रतिध्वनन (Reverberation) कहते हैं।
अंतर समझें
प्रतिध्वनि (Echo): जब ध्वनि का परावर्तन स्पष्ट रूप से मूल ध्वनि से अलग सुनाई दे (जैसे पहाड़ पर "हैलो" बोलने पर "हैलो" दोबारा सुनाई देना)।
प्रतिध्वनन (Reverberation): जब परावर्तित ध्वनियाँ इतनी अधिक और मिश्रित हों कि वे मूल ध्वनि के साथ मिलकर लंबे समय तक सुनाई देती रहें, पर अलग-अलग पहचान में न आएँ।
संक्षेप में:
कई पृष्ठों से परावर्तन के कारण स्रोत द्वारा ध्वनि बंद कर देने के बाद भी ध्वनि का बने रहना प्रतिध्वनन कहलाता है।